Sunday, November 6, 2022

चुनावी चर्चा -2

 आए दिन हिमाचल के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में हिमाचल के अपने नेताओं के अलावा केंद्रीय  सरकार के मंत्रीगण और  बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी  चुनाव सभाएं कर रहे  हैँ और अपने अपने तरीके से मतदाताओं  को लुभाने का प्रयास कर रहे  हैँ. हिमाचल के लिए  भविष्य में क्या रोडमैप है  इसका खुलासा  करने की बजाये  अधिकतर  केंद्र सरकार का महिमा मंडन और  मोदीजी का यशोगान ही सुनने में  आ रहा  है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ज़रूर  वर्तमान मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर  की तारीफ़  की है. योगी जी, आशा के अनुरूप  केवल  भव्य मंदिर तक ही सीमित  रह  गए हैँ जिसका हिमाचल राज्य अथवा यहाँ की जनता से सीधा  कोई सम्बन्ध  नहीं है.वैसे चुनाव के लिए यह मुद्दा  है ही नहीं.


शिमला ग्रामीण विधान सभा  क्षेत्र में बीजेपी ने एक नये चेहरे  के रूप में रवि मेहता को उतारा है, जो काफ़ी आशावान हो कर चुनावी सभाएं कर  रहे हैँ.एक चुनावी सभा  स्मृति ईरानी भी उनके पक्ष  में  कर  चुकी  हैँ.

पहले कई वर्ष सुन्नी क्षेत्र कुमारसेन विधानसभा के अंतर्गत रहा पर राजनीतिक  दृष्टि से इस इलाके की पूछ पूर्व मुख्यमंत्री स्व. श्री वीरभद्र के यहाँ से चुने जाने के बाद शुरू  हुई. कांग्रेस से विधायक विक्रमादित्य सिँह अब दूसरी  बार मैदान में हैँ और  जनसभाएं कर रहे  है .

यह  देखना  दिलचस्प  है  कि बीजेपी शिमला ग्रामीण में तो धरतीपुत्र का नारा दे रही है  पर यही  नारा कसुम्पटी पहुँचते पहुँचते हवा  हो जाता है  कारण, इस विधान सभा क्षेत्र में बीजेपी के प्रत्याशी सुरेश भारद्वाज को छोड़ कर उन के  विरुद्ध खड़े दोनों प्रत्याशी ही धरतीपुत्र हैँ .

मुक़ाबला रोचक और  कड़ा रहने वाला है, no cake walk for anyone. यहाँ का वोटिंग पैटर्न  अलग  किस्म का है. लोग चाहें तो स्वतंत्र प्रत्याशी को जिता दें, पर ऐसा  होगा नहीं .

Wednesday, November 2, 2022

चुनाव चर्चा

विभिन्न मार्गो / साधनों से स्टार प्रचारक  देव भूमि  में  पदार्पण  कर इसे और  पवित्र  कर रहे  हैँ, विशेष तौर पर केंद्रिय नेतृत्व और सरकार के प्रतिनिधि समाचार पत्रों के लिए  भी  आकर्षण का केंद्र बने  हुए हैँ और चुने हुए शब्दों से सज्जित सुर्खियां अपने आप  में बहुत  कुछ  बयान  कर रही  हैँ. कल  गृह मंत्री  अमित शाह  ने तीन  विधानसभा  क्षेत्रों में आ कर  भाषण  दिया.कुछ  विशेष कारण से कसुम्पटी को चुना गया. तथापि ऐसा  लग रहा  था कि चुनाव  हिमाचल विधान सभा का न हो कर  लोकसभा का है. ख़ैर  समर्थक तो तालियाँ  पीटेंगे  ही.

इस विधान सभा क्षेत्र के लिए  बीजेपी प्रत्याशी सुरेश भारद्वाज नये  हैँ  पूर्व में मंत्री और  सांसद  रह चुके  है . कथित  तौर पर उन्हें जिताने की ज़िम्मेदारी केंद्रीय नेतृत्व ले चुका है.

कांग्रेस प्रत्याशी अनिरुद्ध सिँह  मिलनसार  हैँ और लोगों की सहायता के लिए  सदैव  तत्पर  दीखने  के कारण  अपने क्षेत्र में बहुत  लोकप्रिय हैँ.

सीपीआई एम प्रत्याशी पूर्व में भारतीय वन सेवा अधिकारी रह चुके  हैँ और  ईमानदारी, कर्तव्य परायणता और  कार्यकुशलता  के लिए  जाने जाते  हैँ .

कुल मिला कर मुक़ाबला रोचक  रहने  वाला है.


शिमला  शहरी  विधानसभा क्षेत्र में मुक़ाबला त्रिकोणीय ही रहने वाला है.  बीजेपी प्रत्याशी संजय सूद  मीडिया में करोड़ पति  चायवाला के रूप में प्रचारित  हो चुके  हैँ. चाय वाला सन्दर्भ का कितना जादू  चल  पाएगा, देखना  बाक़ी है . मेरे विचार  में सूद  बिरादरी  उन्हें en bloc समर्थन देने वाली है  और  काफ़ी  संख्या  में व्यापारी वर्ग भी . कांग्रेस प्रत्याशी हरीश  जनार्था  का अपना वोट बैंक है और  आकर्षक व्यक्तित्व के चलते समर्थकों की भी कोई कमी नहीं . ऊपरी शिमला के लोग कमोबेश  उन्हें ही वोट करने वाले हैँ .

सीपीआई एम प्रत्याशी टिकेंद्र पंवर  बुद्धिजीवी लोगों में लोकप्रिय हैँ  और  पूर्व में  शिमला नगर निगम में बतौर   उप महापौर  अच्छा कार्य अंजाम  दे चुके  हैँ . शिमला में कार्य रत  कर्मचारी  केवल  शिमला  शहरी  को ही नहीं  बल्कि शिमला ग्रामीण और  कसुम्पटी को भी  प्रभावित  करने  वाले हैँ .

मुक़ाबला दिलचस्प  रहने  वाला है और  पेचीदा  भी.

गत दो चुनावों  में यह सीट  उस समय  की प्रचलित धारणा के विपरीत  by default बीजेपी की झोली  में गयी थी.

अभी के लिए  इतना ही.....!