आज भारतीय सिनेमा के अत्यंत लोकप्रिय पार्श्व गायक मुकेश जी की जयंती है । ज़ोरावरचंद मुकेशचंद्र माथुर का जन्म आज के दिन 1923 में दिल्ली में हुआ था । मुकेश आरम्भ से ही मेरे चहेते गायक रहे हैं । उनके अधिकतर गीत मुझे पसंद हैं । उन्हें फिल्मों में लाने का श्रेय उनके निकट संबंधी प्रसिद्ध अभिनेता मोतीलाल को जाता है । शुरू में मुकेश ने अभिनय में भाग्य आजमाया और दो फिल्मों ' निर्दोष' और 'मेला' में काम भी किया पर आशातीत सफलता न मिल पाने के कारण गायन पर ही पूरा ध्यान केंद्रित किया । अपने समय के सभी नामचीन अभिनेताओं मसलन दिलीप कुमार, राज कपूर, राजेंद्र कुमार, मनोज कुमार, जीतेंद्र, राजेश खन्ना पर फिल्माए गए गीतों को स्वर दिया पर मुख्यत: अभिनेता राज कपूर और संगीतकार शंकर- जय किशन के साथ उनकी विशेष पहचान बनी ।अपने कॉलेज के दिनों में मैंने उर्दू सर्विस से उनके गीतों का खूब आनंद लिया है । फिल्म चंद्रमुखी के लिए गाये उनके गीत - नैन का चैन चुरा कर ले गयी कर गयी नींद हराम- ने मुझ पर लोरी का सा प्रभाव डाला है ।
फिल्म आग, आवारा, यहूदी , अंदाज़, बरसात, संगम, सारंगा, उपकार, बंदिनी,बनारसी ठग, पूरब और पश्चिम, अनाड़ी, आह, मेला, कभी कभी ,तीसरी कसम, , मेरा नाम जोकर, राज हठ, मल्हार ,आनंद,मेला, छलिया, जिस देश में गंगा बहती है, आदि फिल्मों में कई यादगार गीत गाये ।यद्यपि उन्हें राजकपूर की आवाज़ के रूप में जाना जाता है पर राजेश खन्ना पर फिल्माये उनके गीत भी कम लोकप्रिय नहीं रहे ।
उल्लेखनीय है कि शुरुआती दौर में फिल्म पहली नज़र के लिए गाये उनके गीत -दिल जलता है तो जलने दे- को सुन कर के. एल. सहगल ने पूछा ' ये गीत मैंने कब गाया ?' जाहिर है , अन्य गायकों की तरह उन पर भी शुरू में सहगल का प्रभाव रहा ।
फिल्म 'कभी कभी' के लिए गाया उनका गीत -मैं पल दो पल का शाइर हूँ- एक तरह से खुद उन पर लागू हुआ और इस फिल्म के रिलीज़ होने के कुछ अर्से बाद ही 1976 में अमेरिका के डेट्रॉयट में हृदयाघात के कारण इनका निधन हुआ ।
महान गायक को हमारी विनम्र श्रद्धांजलि 🙏



