Thursday, July 23, 2026

शिव कुमार बटालवी

 ‘बिरह दा सुल्तान’ शिव बटालवी, पंजाबी कविता का एक अमिट हस्ताक्षर। शिव बटालवी की आज जयंती है। अपने जीवन के 37वें वर्ष में ही इस संसार को अलविदा कहने वाले इस अत्यंत लोकप्रिय कवि को सबसे कम उम्र में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित होने का गौरव हासिल है। अपने अल्प जीवन काल में ‘लूना‘ काव्यनाटक की रचना के साथ साथ अनेकों गीत व कविताएं भी रची। उनकी कविताओं में सौंदर्य, प्रेम , भावावेग, विरह आदि सब का समावेश मिलता है । बिरह का शिव बटालवी की कविताओं में जो बाहुल्य या आधिक्य बल्कि उसके प्रति जो जनून मिलता है, उसकी पृष्ठभूमि में अधूरे प्रेम प्रसंग हैं । हिमाचल के बैजनाथ में एक मेले में मैना नाम की एक लड़की से मिलना और फिर उसकी खोज में उसके गाँव जाना और वहाँ उस लड़की की मृत्यु का समाचार मिलना एक प्रसंग है जिसकी पीड़ा ने शायद शिव बटालवी को ताउम्र सताया होगा ।एक अन्य प्रसंग में एक अन्य लड़की जिससे उन्हें प्यार था, का विवाह और जगह हो जाना भी पीड़ा का एक कारण रहा हो सकता है । बिना आडंबर के,सीधे सादे शब्दों में गूढ़ भावों की अभिव्यक्ति शिव बटालवी को अलग पहचान ही नहीं देती बल्कि उन्हें कवियों की अग्रिम पंक्ति मे भी खड़ा करती है. ’मैनु तेरा शबाब लै बैठा.....’ और ‘चरखा मेरा रंगला विच सोने दियाँ मेखां......’ तो लोकप्रियता के शीर्ष पर हैं।उनकी कविता में क्लासिकल और रोमांटिक दोनों का समावेश और समन्वय मिलता है। यूं उनकी तुलना अंग्रेज़ रोमांटिक कवि शैले से भी की गई है परंतु शिव बटालवी, जॉन कीट्स के भी काफी निकट पाये जाते हैं। सौन्दर्य बोध , मृत्यु की ईच्छा व मृत्यु का पूर्वाभास दोनों में पाया जाता है। उल्लेखनीय है कि शिव बटालवी और कीट्स दोनों ने ही दीर्घायु नहीं पाई और युवावस्था में ही इस संसार को अलविदा कह गए .

शिव बटालवी के गीत/ कविता की एक बानगी:

“असां ते जोबण रुते मरना

टुर जाणा असां भरे भराये

एह मेरा गीत किसे न गाणा

एह मेरा गीत मैं आपे गा के

भलके ही मर जाणा.......”

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“माये नी माये

मैं इक शिकरा यार बनाया

ओदे सिर ते कलगी

ओदे पैरीं झाँझर

ते ओ चोग चुगेंदा आया......”

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“ जाच मैनु आ गयी गम खाण दी

हौली हौली रो के जी परचाण दी......”

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“जी करदा ए इस दुनिया नू मैं हस के ठोकर मार देयां......”

शब्दों के इस चितेरे को हमारी विनम्र श्रद्धांजलि 🙏


चन्द्रशेखर आज़ाद

महान क्रांतिकारी , देशभक्त  स्व. चन्द्रशेखर  आज़ाद की आज 120वीं जयंती है। मात्र 15 वर्ष की आयु में महात्मा गांधी के आह्वान  पर असहयोग आंदोलन में कूद कर अपना क्रांतिकारी जीवन आरंभ करने उपरांत बाद में    राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक़उल्ला खाँ, ठाकुर रोशन सिंह, और भगत सिंह सरीखे  क्रांतिकारियों  के साथी रहे  चन्द्रशेखर आज़ाद ने स्वतन्त्रता संग्राम के दौरान काकोरी काण्ड जैसी कई क्रांतिकारी गतिविधियों को अंजाम दिया  और कई बार पुलिस को चकमा देने में सफल रहे । ज्ञातव्य है कि उनके भारी भरकम डील-डौल  को देखते हुए भगत सिंह उनसे कहा करते थे कि पंडित जी आपको फांसी पर  लटकाने  के लिए अंग्रेजों को  विशेष रस्सी का प्रबंध करने पड़ेगा. आज़ाद का उत्तर यही होता था कि मैं जीते जी  अंग्रेजों के हाथ कभी नहीं आऊँगा । अपनी इसी बात को  चरितार्थ करते हुए आज़ाद  आखिर  तक ‘आज़ाद’ ही रहे और  पुलिस  वालों से घिर जाने पर  अपनी  पिस्तौल से  खुद को गोली मार कर शहीद हो गए । बचपन में  उन पर बनी फिल्म ‘चन्द्रशेखर  आज़ाद’ देखी थी । उसमे दिखाया गया था कि बंदूकों से लैस पुलिस उनके निर्जीव शरीर के निकट जाने से  भी  डर रही थी । 

महान क्रांतिकारी देशभक्त  को कोटिश: नमन 🙏


Wednesday, July 22, 2026

मुकेश


 आज भारतीय  सिनेमा के अत्यंत लोकप्रिय पार्श्व गायक मुकेश जी की जयंती है । ज़ोरावरचंद मुकेशचंद्र  माथुर का जन्म आज के दिन 1923 में दिल्ली में हुआ था । मुकेश आरम्भ से ही मेरे  चहेते गायक रहे हैं । उनके अधिकतर गीत मुझे  पसंद हैं । उन्हें  फिल्मों में  लाने का श्रेय उनके निकट संबंधी  प्रसिद्ध अभिनेता मोतीलाल को जाता है । शुरू में मुकेश ने अभिनय में  भाग्य आजमाया और दो फिल्मों ' निर्दोष' और 'मेला'  में काम भी किया पर  आशातीत सफलता न मिल पाने के कारण  गायन पर ही पूरा ध्यान केंद्रित किया । अपने समय के सभी नामचीन अभिनेताओं मसलन दिलीप कुमार, राज कपूर, राजेंद्र कुमार,  मनोज कुमार, जीतेंद्र, राजेश खन्ना पर फिल्माए गए गीतों को स्वर दिया पर मुख्यत:  अभिनेता राज कपूर और संगीतकार शंकर- जय किशन के साथ उनकी विशेष पहचान बनी ।अपने कॉलेज के दिनों में मैंने उर्दू सर्विस से उनके गीतों का खूब आनंद लिया है । फिल्म चंद्रमुखी के लिए गाये उनके गीत - नैन का चैन चुरा कर ले गयी कर गयी नींद हराम- ने  मुझ पर लोरी का सा प्रभाव डाला है ।

फिल्म आग, आवारा, यहूदी , अंदाज़, बरसात, संगम, सारंगा, उपकार, बंदिनी,बनारसी ठग, पूरब और पश्चिम, अनाड़ी, आह, मेला, कभी कभी ,तीसरी कसम, , मेरा नाम जोकर, राज हठ, मल्हार ,आनंद,मेला, छलिया, जिस देश में गंगा बहती है, आदि फिल्मों में कई यादगार गीत गाये ।यद्यपि उन्हें राजकपूर की आवाज़ के रूप में जाना जाता है पर राजेश खन्ना पर फिल्माये उनके गीत भी कम लोकप्रिय नहीं रहे । 

उल्लेखनीय है कि शुरुआती दौर में फिल्म  पहली नज़र के लिए गाये उनके गीत -दिल जलता है तो जलने दे- को सुन कर  के. एल. सहगल ने पूछा ' ये गीत मैंने कब गाया ?' जाहिर है , अन्य गायकों की तरह उन पर भी शुरू में सहगल का प्रभाव रहा  ।

फिल्म 'कभी कभी' के लिए गाया उनका गीत -मैं पल दो पल का शाइर हूँ-  एक तरह से खुद उन पर  लागू हुआ और  इस फिल्म के रिलीज़ होने के कुछ अर्से बाद ही 1976 में अमेरिका के डेट्रॉयट में हृदयाघात के कारण इनका  निधन हुआ ।

महान गायक को हमारी विनम्र श्रद्धांजलि  🙏

Sunday, July 5, 2026

Teejan Bai

 ALVIDA Teejan Bai, the celebrated Pandvani exponent !!

Humble tributes 🙏


Saturday, July 4, 2026

नानक सिंह


 नानक सिंह, पंजाबी कवि और उपन्यासकार, जिनके उपन्यास ' पवित्र पापी ' पर इसी नाम से फ़िल्म बनी जिसमे बलराज साहनी, तनूजा और परीक्षित साहनी मुख्य भूमिका में नज़र आए.

जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि 🙏

Saturday, June 27, 2026

NCERT - unnecessary change in Syllabus

 What is NCERT up to !

A news headline reads " NCERT drops French & Russian Revolution....."

 I remember in the ' 60s, combined syllabus of Social Studies for ix & x class there was a chapter on the 1789 AD  French Revolution, highlighting the names of contemporary thinkers and writers Rousseau  & Voltaire. Their teachings were about  Liberty, Equality and Fraternity, which universally remain the cardinal principles of Humanity.  About Russian Revolution we knew from other sources.

What makes NCERT  take such a decision is beyond comprehension.

Reportedly a substitution is made by adding chapters on Vedas and other Ancient Indian Philosophy. One can hardly have an issue with teaching Vedas, Upanishads etc. But why drop the important events that happened in other parts of the world ? Is it worthwhile to close our eyes and mind to the outside World ?

Another 'wonderful' chapter has been added lauding the ECI for successful implementation of SIR which ironically has met with criticism nationwide.

Of course addition and not substitution is the way forward that too with sagacity and foresight.

Let's not create a generation of Zombies.

Sunday, June 21, 2026

TEETH, THE PRECIOUS POSSESSION

 SUNDAY MUSINGS -


Never been lucky to have a beautiful line of pearly teeth, I have always envied people gifted with shiny symmetrical denture. My asymmetric assemblage has sometimes invited the uncharitable comparison with Dracula which I knew was an exaggeration. Despite all this I could not care less for the cosmetic side as long as I had no problem with biting into food, the sole purpose of having been equipped with  the tool. I have had trouble due to toothache occurring many a time but got over with minor medication. 

Fortunately I  didn't have to go for RCT or removal of an odd tooth.

So far so good.  Now over a period of time I have lost half my teeth, and as if by some design, am denied the luxury of having roasted chana, my all time favourite. Not a big deal even this.

To make the matters worse, my better half points out to some change in my voice, attributing it to my loss of teeth. Regularly she keeps persuading me to go for denture, which advice I hardly relish. Removal of my remaining natural teeth and replacing them with an artificial equipment - the idea simply does not amuse me and puts me off !

No false claims of Abhi To Main Jawan Hun  in my case.........!